Sunday, 29 September 2019

पेट का मोटापा कम करने व कब्ज ठीक करने के लिए महत्वपूर्ण योगासन - Important Yogasanas to reduce abdominal obesity and cure constipation [ayurvedicsujhav]

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लोगों को मोटापे व कब्ज की problem अधिकतर होने लगी है। लोग मोटापे से बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं। मोटापा बढ़ने से लोगों की problem भी बढ़ने लगती है। क्योंकि शरीर में मोटापा है तो अपने साथ अन्य प्रकार की बीमारियों को भी लेकर आता है। मोटापा बीमारियों का घर होता है। मोटापा बढ़ने से व्यक्ति की कब्ज problem भी काफी बढ़ जाती है मोटापा बढ़ने से शरीर का looks भी कम हो जाता है मोटापा बढ़ने का प्रमुख कारण होता है कि खानपान की शैली सही नहीं होना। व्यायाम नहीं करना आदि
 तो आइए आज हम आपको बताएंगे कि आप कौन कौनसे योगासन करके अपना मोटापा कम हुए कब से ठीक कर सकते हैं।

पेट का मोटापा कम करने व कब्ज ठीक करने के लिए महत्वपूर्ण योगासन

1. गोमुखासन- 


जमीन पर आराम की मुद्रा में बैठ जाए बाएं पैर को मोड़कर एडी को दाएं नितंब के पास रखें। दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर के ऊपर एक दूसरे से स्पर्श करते हुए रखें। दोनों जांघ एक दूसरे के ऊपर रखें। फिर दाहिने हाथ को ऊपर उठाकर दाहिने कंधे को ऊपर किए हुए हाथ को पीछे पीठ की ओर ले जाए। बाएं हाथ को पेट के पास से पीठ के पीछे से लेकर दाहिने हाथ के पंजे को पकड़े। गर्दन व कमर सीधी रखे लगभग 1 मिनट तक करने के बाद दूसरे ओर भी ऐसे ही करें

सावधानी - 

रीड की हड्डी में कोई problem है और घुटनों में दर्द है तो यह योगासन ना करें। 
अन्यथा प्रॉब्लम बढ़ सकती है।

2. उष्ट्रासन - 


वज्रासन की स्थिति में बैठने के बाद घुटनों के ऊपर खड़े होकर पैर के तलवों पर हथेलिया रखें। गर्दन को ढीला छोड़ दें और पेट को आसमान की ओर उठाएं। लगभग 5-10 सेकंड इस मुद्रा में रहने के बाद आराम की मुद्रा में आ जाए। इस प्रक्रिया को लगातार चार पांच बार कर सकते है। यह आसन करने से पेट संबंधी रोग, एसिडिटी, कब्ज, अपच, घुटने, ब्लेडर, किडनी, छोटी आंत, लीवर, पिंडलियों, पैरों, कंधे, कोहनी संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।

सावधानी - 

हृदय संबंधी रोग, हर्निया के मरीज इस आसन को न करें ।स्लिप्ड डिस्क के मरीज भी बिना expert की मदद के न करें

3.त्रिकोणासन - 


यह योगासन पेट की चर्बी कम करने में सबसे महत्वपूर्ण होता है। यह योग करते समय शरीर की आकृति त्रिकोण के जैसे हो जाती हैं इसलिए इसे त्रिकोणासन कहते हैं।
इसे करने के लिए अपने दोनों पैरों को फैला है और अपने दोनों हाथों को शरीर के साथ चिपकाए रखें। अब अपनी बाहों को body से दूर कंधे तक ले जाए और सांस अंदर लेते हुए दाएं हाथ को कान के पास सीधा ऊपर ले जाए और कान से चिपका ले। इसके बाद में सांस बाहर छोड़ते हुए अपने कमर को हाथ के विपरीत side अर्थात बाए ओर झुके। इस time आप का दाया हाथ कौन से चिपका रहना चाहिए और घुटने भी सीधे रहने चाहिए।
अब दाएं हाथ को जमीन के समानांतर लाइए इसके साथ ही बाएं हाथ को बाएं पैर के टकने को छूने का प्रयास करें। आधे मिनट इसी अवस्था मे रहे। इसके बाद सांस अंदर लेते हुए आराम की मुद्रा में आ जाए। यह प्रक्रिया दाई और भी करें ऐसा करने से पूरी body में खिंचाव महसूस होगा जिससे कमर दर्द ठीक होने लगेगा ऐसा करने से फेफड़े स्वस्थ होंगे। ऐसा करने से कब्ज भी दूर होगी।

सावधानी - 

High B.P व low B.P होने तथा अधिक एसिडिटी होने पर भी योगासन नहीं करें। पीठ, कमर दर्द ,गर्दन दर्द, तथा चक्कर आने पर योगासन नहीं करें।

4.ताड़ासन - 


पंजे के बल खड़े रहकर दोनों हाथों को ऊपर ले जाइए फिर हाथों के अंगुलियों को लोक लगाकर हाथों के पंजों को ऊपर की ओर मोड़ दे। हथेली आसमान की ओर रहे। गर्दन सीधी रखें। कुछ देर इसी अवस्था में रहकर आराम की मुद्रा में आ जाए। शुरुआत में 5- 10 बार कर सकते हैं। नियमित करने से पैरों पंजे पिंडलियों में मजबूती में फायदा मिलता है। बच्चों के शारीरिक विकास और लंबाई बढ़ाने में यह योगासन बहुत फायदेमंद होता है।

सावधानी - 

गर्भवती महिलाएं जिनके घुटनों में दर्द है उन्हें ये योगासन नहीं करना चाहिए। High B.P  के मरीज को भी नहीं करना चाहिए।

5. भुजंगासन - 


पेट के बल लेटने के बाद हाथों को कोहनियो से मोड़ते हुए हथेलीयो को बाजूओ के नीचे रखें। हथेली पर दबाव बनाते हुए सिर को ऊपर उठाए।तीन से चार बार यह आसन करें। पेट की चर्बी घटती है। फेफड़े और रीड की हड्डी मजबूत होती है। पीठ लचीली होती है। कब्ज, पाचन, दमा पुरानी खांसी में मिला मिलता है।

सावधानी - 

High B.P. , गर्दन में दर्द मांसपेशियों में खिंचाव है तो यह योगासन नहीं करना चाहिए

6. उत्तानपादासन - 


 उत्तानपादासन में अपने दोनों पैरों को थोड़ा ऊपर उठाए जाता है इसलिए उत्तानपादासन कहते हैं। यह योगासन लेट कर किया जाने वाले आसनों में सबसे महत्वपूर्ण है। पेट की चर्बी को कम करने में महत्वपूर्ण होता है। इस योगासन को करने से पेट की मांसपेशियों मजबूत होती तथा पाचन क्षमता भी बढ़ती है। तथा यह पेट में गैस एसिडिटी कब्ज को भी ठीक करता है।
योगासन करने के लिए जमीन पर चादर बिछाकर उस पर आराम की मुद्रा में लेट जाए अब हाथों को शरीर से चिपका ले और हथेलियों को जमीन की ओर कर ले। अब गहरी सांस अंदर लेते हुए अपने दोनों पैरों को हवा में ऊपर उठाना चाहिए। पैरों को 30 डिग्री तक ही ऊपर ले जाये यानि अपने पैर खुद को देखने नहीं चाहिए। सिर भी नहीं हलना चाहिए इस मुद्रा में। अब इस मुद्रा में सांस अंदर लेते हुए व बाहर छोड़ते रहना चाहिए। इस मुद्रा में लगभग 30 सेकंड तक रहना चाहिए बाद में गहरी सांस छोड़ते हुए अपने पैरों को जमीन की ओर ले आए
योगासन कम से कम तीन-चार बार करना चाहिए

सावधानी - 

गर्भावस्था के समय यह योगासन नहीं करना चाहिए। जिनके पेट का ऑपरेशन हुआ है उन्हें भी नहीं करना चाहिए।
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